श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.52.64 
मम प्रियार्थं राज्ञश्च सुमन्त्र त्वं पुरीं व्रज।
संदिष्टश्चापि यानर्थांस्तांस्तान् ब्रूयास्तथा तथा॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
'सुमन्त्रजी! मुझे और राजा को प्रसन्न करने के लिए आप कृपया अयोध्यापुरी में पधारें और वहाँ जाकर उन सब लोगों को बताएँ जिनके लिए आपको संदेश दिया गया है।'॥64॥
 
'Sumantraji! To please me and the King, please do visit Ayodhyapuri and go there and tell all the people for whom you have been given the message.'॥ 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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