श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.52.63 
एष मे प्रथम: कल्पो यदम्बा मे यवीयसी।
भरतारक्षितं स्फीतं पुत्रराज्यमवाप्स्यते॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हें भेजने का मेरा मुख्य उद्देश्य यह है कि मेरी छोटी माता कैकेयी भरत द्वारा रक्षित समृद्ध राज्य का कार्यभार संभालें।'
 
'My main purpose in sending you is that my younger mother Kaikeyi should take over the prosperous kingdom protected by Bharat. 63.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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