श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.52.6 
अस्यवाहनसंयुक्तां कर्णग्राहवतीं शुभाम्।
सुप्रतारां दृढां तीर्थे शीघ्रं नावमुपाहर॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हें जल्दी से घाट पर एक ऐसी नाव लानी चाहिए जो मजबूत हो, खेने में आसान हो, जिसमें चप्पू लगे हों, उस पर एक नाविक बैठा हो और नाव सुंदर दिख रही हो।'
 
‘You should quickly bring to the ghat a boat that is strong and easy to row, has oars, a helmsman is sitting on it and the boat looks beautiful.’
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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