vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
»
श्लोक 59
श्लोक
2.52.59
एवं बहुविधं दीनं याचमानं पुन: पुन:।
रामो भृत्यानुकम्पी तु सुमन्त्रमिदमब्रवीत्॥ ५९॥
अनुवाद
इस प्रकार बहुत से विनीत वचन कहकर और सुमन्तराम की कृपा की बारंबार याचना करके, सेवकों पर दया करने वाले श्री रामजी ने इस प्रकार कहा-॥59॥
Thus uttering many humble words and repeatedly pleading with the blessings of Sumantram, Sri Rama, who shows mercy to his servants, said thus -॥ 59॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas