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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
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श्लोक 5
श्लोक
2.52.5
स तु रामस्य वचनं निशम्य प्रतिगृह्य च।
स्थपतिस्तूर्णमाहूय सचिवानिदमब्रवीत्॥ ५॥
अनुवाद
श्री रामजी के वचन सुनकर उनकी आज्ञा मानकर निषादराज ने तुरन्त अपने सचिवों को बुलाया और इस प्रकार कहा:-॥5॥
Having heard the words of Shri Rama, having accepted his command the King of Nishads immediately called his secretaries and said thus:-॥ 5॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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