श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.52.49 
यदि मे याचमानस्य त्यागमेव करिष्यसि।
सरथोऽग्निं प्रवेक्ष्यामि त्यक्तमात्र इह त्वया॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
यदि मेरे इस प्रकार विनती करने पर भी आप मुझे त्याग देंगे, तो मैं आपके द्वारा त्यागा हुआ अपने रथसहित यहीं अग्नि में प्रवेश कर जाऊँगा॥ 49॥
 
'If despite my pleading like this you will abandon me, then I, abandoned by you, will enter the fire along with my chariot here.॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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