श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.52.48 
तन्न शक्ष्याम्यहं गन्तुमयोध्यां त्वदृतेऽनघ।
वनवासानुयानाय मामनुज्ञातुमर्हसि॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
अतः हे भोले रघुनन्दन! अब मैं आपके बिना अयोध्या नहीं लौट सकूँगा। कृपया मुझे वन जाने की अनुमति प्रदान करें।
 
‘Therefore, O innocent Raghunandan! Now I will not be able to return to Ayodhya without you. Please give me permission to go to the forest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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