श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.52.47 
मम तावन्नियोगस्थास्त्वद‍्बन्धुजनवाहिन:।
कथं रथं त्वया हीनं प्रवाह्यन्ति हयोत्तमा:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
ये उत्तम घोड़े मेरी आज्ञा से आपके सम्बन्धियों का भार ढोते हैं (आपके सम्बन्धियों के बिना रथ को ये नहीं ढोते), अतः आपके खाली रथ को ये कैसे खींच सकेंगे?॥ 47॥
 
'These excellent horses, under my command, carry the burden of your relatives (they do not carry the chariot lacking your relatives), so how will they be able to pull an empty chariot of yours?॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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