श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.52.43 
दृष्टं तद् वै त्वया राम यादृशं त्वत्प्रवासने।
प्रजानां संकुलं वृत्तं त्वच्छोकक्लान्तचेतसाम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! जब आप वन को लौटने वाले थे, तब आपने शोक से व्याकुल अपनी प्रजा का विलाप और क्रोध देखा होगा॥ 43॥
 
'Shri Ram! When you were about to return to the forest, you must have seen the wailing and anger expressed by your subjects who were distraught with grief.॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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