श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.52.40 
सराममपि तावन्मे रथं दृष्ट्वा तदा जन:।
विना रामं रथं दृष्ट्वा विदीर्येतापि सा पुरी॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
'आते समय लोगों ने मेरे रथ पर बैठे हुए भगवान राम को देखा था, अब इस रथ को भगवान राम के बिना देखकर उन लोगों का तथा अयोध्यापुरी का भी हृदय टूट जाएगा॥40॥
 
'While coming, people had seen Lord Rama seated in my chariot, now seeing this chariot without Lord Rama, the hearts of those people and of Ayodhyapuri too will be broken. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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