vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
»
श्लोक 37
श्लोक
2.52.37
निवर्त्यमानो रामेण सुमन्त्र: प्रतिबोधित:।
तत्सर्वं वचनं श्रुत्वा स्नेहात् काकुत्स्थमब्रवीत्॥ ३७॥
अनुवाद
जब श्री राम ने सुमन्त्र को लौटाते समय यह बात समझाई, तब उसकी सारी बातें सुनकर वह श्री राम से स्नेहपूर्वक बोला-॥37॥
When Shri Rama explained this to Sumanthra while returning him, then after listening to all his words, he spoke to Shri Rama affectionately -॥ 37॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas