श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.52.36 
तातस्य प्रियकामेन यौवराज्यमवेक्षता।
लोकयोरुभयो: शक्यं नित्यदा सुखमेधितुम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'यदि तुम अपने पिता को प्रसन्न करने की इच्छा से युवराज का पद स्वीकार करोगे और राज्य का कामकाज संभालते रहोगे तो तुम्हें इस लोक और परलोक में सदैव सुख मिलेगा।'
 
'If you accept the post of crown prince with the desire to please your father and keep taking care of the affairs of the kingdom, then you will always find happiness in this world and the next world'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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