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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
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श्लोक 35
श्लोक
2.52.35
यथा च तव कैकेयी सुमित्रा चाविशेषत:।
तथैव देवी कौसल्या मम माता विशेषत:॥ ३५॥
अनुवाद
'आपकी दृष्टि में कैकेयी का स्थान सुमित्रा और मेरी माता कौशल्या के समान होना चाहिए। उनमें कोई भेद न करें।'
'In your eyes, the place that Kaikeyi has should be equal to that of Sumitra and my mother Kausalya. Make no difference between them.'
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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