श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.52.31 
आरोग्यं ब्रूहि कौसल्यामथ पादाभिवन्दनम्।
सीताया मम चार्यस्य वचनाल्लक्ष्मणस्य च॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
माता कौशल्या से कहना कि आपका पुत्र स्वस्थ और प्रसन्न है। इसके बाद सीता की ओर से, मुझ ज्येष्ठ पुत्र की ओर से तथा लक्ष्मण की ओर से भी माता के चरणों में प्रणाम करना। 31॥
 
‘Tell Mother Kausalya that your son is healthy and happy. After this, on behalf of Sita, on behalf of me, the eldest son, and also on behalf of Lakshman, please say obeisance to the Mother's feet. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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