श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.52.25 
एतदर्थं हि राज्यानि प्रशासति नराधिपा:।
यदेषां सर्वकृत्येषु मनो न प्रतिहन्यते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘राजा लोग अपने राज्य का संचालन इस प्रकार करते हैं कि उनकी कामनाओं की पूर्ति में कोई बाधा न आए।॥25॥
 
‘Kings rule their kingdom so that no obstacle is created in the fulfillment of their desires.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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