श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.52.23 
शोकोपहतचेताश्च वृद्धश्च जगतीपति:।
कामभारावसन्नश्च तस्मादेतद् ब्रवीमि ते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी के राजा दशरथ वृद्ध हो गए हैं और उनकी समस्त कामनाएँ नष्ट हो गई हैं। अतः उनका हृदय शोक से व्याकुल है। इसलिए मैं आपसे उनका ध्यान रखने के लिए कह रहा हूँ॥ 23॥
 
‘King of the Earth, King Dasharath is old and all his desires have been shattered. Therefore, his heart is afflicted with grief. That is why I am asking you to take care of him.॥ 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas