श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.52.21 
ततस्तु विगते बाष्पे सूतं स्पृष्ट्वोदकं शुचिम्।
रामस्तु मधुरं वाक्यं पुन: पुनरुवाच तम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब आँसुओं का प्रवाह रुक गया, तब श्री रामजी ने जल के घूँट पीकर अपने को पवित्र करके सारथि से मधुर वाणी में बार-बार कहा - ॥21॥
 
After the flow of tears stopped, Sri Rama, having purified himself by sip of water, said to the charioteer in a sweet voice repeatedly - ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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