श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.52.19 
वयं खलु हता राम ये त्वया ह्युपवञ्चिता:।
कैकेय्या वशमेष्याम: पापाया दु:खभागिन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! हम निश्चय ही सब प्रकार से मारे गए हैं; क्योंकि आप हमें साथ नहीं ले गए और हम नगरवासियों को आपके दर्शन के आनन्द से वंचित कर दिया। अब हम पापिनी कैकेयी के हाथों में पड़कर दुःख भोगते रहेंगे।'॥19॥
 
'Shri Ram! We have surely been killed in every way; because you did not take us along with you and deprived us, the people of the city, of the joy of seeing you. Now we will fall into the hands of the sinful Kaikeyi and will continue to suffer.'॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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