न मन्ये ब्रह्मचर्ये वा स्वधीते वा फलोदय:।
मार्दवार्जवयोर्वापि त्वां चेद् व्यसनमागतम्॥ १७॥
अनुवाद
'जब आप जैसे महापुरुष पर ऐसी विपत्ति आ पड़ी है, तब मैं समझता हूँ कि ब्रह्मचर्य, वेदों का स्वाध्याय, दया या सरलता भी कोई फल नहीं देगी।॥17॥
'When such a calamity has befallen a great man like you, I realize that even celibacy, self-study of the Vedas, kindness or simplicity will not yield any result.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥