न मन्ये ब्रह्मचर्ये वा स्वधीते वा फलोदय:।
मार्दवार्जवयोर्वापि त्वां चेद् व्यसनमागतम्॥ १७॥
अनुवाद
'जब आप जैसे महापुरुष पर ऐसी विपत्ति आ पड़ी है, तब मैं समझता हूँ कि ब्रह्मचर्य, वेदों का स्वाध्याय, दया या सरलता भी कोई फल नहीं देगी।॥17॥
'When such a calamity has befallen a great man like you, I realize that even celibacy, self-study of the Vedas, kindness or simplicity will not yield any result.॥ 17॥