श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.52.15 
आत्मानं त्वभ्यनुज्ञातमवेक्ष्यार्त: स सारथि:।
सुमन्त्र: पुरुषव्याघ्रमैक्ष्वाकमिदमब्रवीत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
घर लौटने की अनुमति प्राप्त हुई देखकर सारथि सुमन्त्र शोक से व्याकुल हो गए और इक्ष्वाकुनन्दन पुरुषसिंह श्री राम से इस प्रकार बोले- ॥15॥
 
Seeing that he had received permission to return home, the charioteer Sumantra became distraught with grief and Ikshva Kunandan Purush Singh spoke to Shri Ram thus - 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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