श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.52.14 
निवर्तस्वेत्युवाचैनमेतावद्धि कृतं मम।
रथं विहाय पद्‍भ्यां तु गमिष्यामो महावनम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने कहा, "राजा की अनुमति से मैं रथ द्वारा यहाँ तक आया हूँ। अब हम रथ छोड़कर पैदल ही महान वन की ओर चलेंगे; अतः आप कृपया लौट जाइये।"
 
He then said, "With the permission of the King, I have travelled this far by chariot. Now we will leave the chariot and travel to the great forest on foot; therefore, you please return."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas