श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.52.13 
ततोऽब्रवीद् दाशरथि: सुमन्त्रं
स्पृशन् करेणोत्तमदक्षिणेन।
सुमन्त्र शीघ्रं पुनरेव याहि
राज्ञ: सकाशे भव चाप्रमत्त:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब दशरथपुत्र श्री राम ने सुमन्त्र को अपने दाहिने हाथ से स्पर्श करते हुए कहा, 'सुमन्त्रजी! अब आप शीघ्र ही राजा के पास लौट जाइये और वहाँ सावधान रहिये।'
 
Then, touching Sumantr with his right hand, Sri Rama, the son of Dasharatha, said, 'Sumantraji, now you should return to the King as soon as possible and remain cautious there.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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