श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.52.11 
तत: कलापान् संनह्य खड्गौ बध्वा च धन्विनौ।
जग्मतुर्येन तां गङ्गां सीतया सह राघवौ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर राम और लक्ष्मण ने कवच धारण किया, तरकश और तलवार बाँधी और धनुष लेकर दोनों भाई सीता के साथ उसी मार्ग से गंगा नदी के तट पर गए, जिस मार्ग से सभी लोग घाट पर जाते थे।
 
Having said this, Rama and Lakshmana put on armour, tied quiver and sword, and taking bow, both the brothers went with Sita to the bank of river Ganga by the same route by which everybody used to go to the ghat.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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