श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.52.101 
स लोकपालप्रतिमप्रभाव-
स्तीर्त्वा महात्मा वरदो महानदीम्।
तत: समृद्धान् शुभसस्यमालिन:
क्रमेण वत्सान् मुदितानुपागमत्॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
जगत के रक्षकों के समान प्रभावशाली और मंगलकारी महात्मा श्रीराम ने महान गंगा नदी को पार करके धीरे-धीरे धन-धान्य से परिपूर्ण वत्स देश (प्रयाग) में पहुँचकर वहाँ के लोगों को अत्यन्त स्वस्थ और बलवान बनाया।
 
Mahatma Shri Ram, who was as effective as the protectors of the world and bestowed blessings, crossed the great river Ganga and gradually reached the prosperous Vatsa Desh (Prayag), which was rich in wealth and grains. The people there were very healthy and robust. 101.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)