श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.52.10 
अथोवाच महातेजा रामो गुहमिदं वच:।
कृतकामोऽस्मि भवता शीघ्रमारोप्यतामिति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली श्रीराम ने गुह से इस प्रकार कहा - 'मित्र! तुमने मेरी सारी इच्छाएँ पूरी कर दी हैं, अब शीघ्रता से सारा सामान नाव पर लाद लो।'
 
Then the mighty Sri Rama addressed Guha thus - 'Friend! You have fulfilled all my desires, now quickly load all the goods on the boat.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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