श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.52.1 
प्रभातायां तु शर्वर्यां पृथुवक्षा महायशा:।
उवाच राम: सौमित्रिं लक्ष्मणं शुभलक्षणम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब रात्रि बीत गई और प्रातःकाल हुआ, तब चौड़े वक्ष वाले तेजस्वी श्री रामजी ने शुभ गुणों से युक्त सुमित्रापुत्र लक्ष्मण से कहा -॥1॥
 
When the night passed and the morning came, the broad-chested and illustrious Sri Rama spoke to Sumitra's son Lakshmana who was endowed with auspicious qualities -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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