श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.51.25 
अपि सत्यप्रतिज्ञेन सार्धं कुशलिना वयम्।
निवृत्ते वनवासेऽस्मिन्नयोध्यां प्रविशेमहि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'क्या इस वनवास काल के समाप्त होने पर हम सत्यनिष्ठ श्री राम के साथ अयोध्यापुरी में सकुशल प्रवेश कर सकेंगे?'॥ 25॥
 
'Will we be able to enter Ayodhyapuri safely with truthful Shri Ram after this period of exile is over?'॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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