श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.51.17 
कथं पुत्रं महात्मानं ज्येष्ठपुत्रमपश्यत:।
शरीरं धारयिष्यन्ति प्राणा राज्ञो महात्मन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘महान् राजा दशरथ की आत्मा अपने ज्येष्ठ पुत्र महात्मा श्री रामजी को न देखकर शरीर में कैसे रह सकती है?॥17॥
 
‘How can the soul of the great King Dasharatha remain in his body if he does not see his eldest son, the great soul, Sri Rama?॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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