श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.51.16 
अनुरक्तजनाकीर्णा सुखालोकप्रियावहा।
राजव्यसनसंसृष्टा सा पुरी विनशिष्यति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'जो अयोध्या नगरी भगवान राम के भक्तों से परिपूर्ण है और जिसने सदैव दर्शन रूपी सुख की अभीष्ट वस्तु प्रदान की है, वह राजा दशरथ की मृत्यु से उत्पन्न हुए शोक से पीड़ित होकर नष्ट हो जाएगी॥ 16॥
 
'The city of Ayodhya, which is filled with devotees of Lord Rama and which has always provided the desired object like the vision of happiness, will be destroyed after being afflicted with the sorrow caused by the death of King Dasharatha.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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