श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.51.14 
कौसल्या चैव राजा च तथैव जननी मम।
नाशंसे यदि जीवन्ति सर्वे ते शर्वरीमिमाम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मैं यह नहीं कह सकता कि रानी कौशल्या, राजा दशरथ और मेरी माता सुमित्रा आज रात तक जीवित रहेंगे या नहीं॥ 14॥
 
‘I cannot say whether Queen Kausalya, King Dasharatha and my mother Sumitra will remain alive till tonight or not.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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