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ramayan 2.51.13: 'पिताजी! महल की स्त्रियाँ अवश्य ही अत्यधिक परिश्रम के कारण जोर-जोर से चिल्लाकर चुप हो गई होंगी। मुझे लगता है कि अब तक राजमहल का कोलाहल और रोना-धोना शांत हो गया होगा।॥13॥   |   ramayan सर्ग 2.51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.51.13 
विनद्य सुमहानादं श्रमेणोपरता: स्त्रिय:।
निर्घोषोपरतं तात मन्ये राजनिवेशनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! महल की स्त्रियाँ अवश्य ही अत्यधिक परिश्रम के कारण जोर-जोर से चिल्लाकर चुप हो गई होंगी। मुझे लगता है कि अब तक राजमहल का कोलाहल और रोना-धोना शांत हो गया होगा।॥13॥
 
'Father! The women of the palace must have cried out loudly and have fallen silent due to the excessive exertion. I think the uproar and cries in the royal palace must have subsided by now.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)