श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 50: श्रीराम का शृङ्गवेरपुर में गङ्गा तट पर पहुँचकर रात्रि में निवास, वहाँ निषादराज गुह द्वारा उनका सत्कार  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.50.46 
एते हि दयिता राज्ञ: पितुर्दशरथस्य मे।
एतै: सुविहितैरश्वैर्भविष्याम्यहमर्चित:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'ये घोड़े मेरे पिता राजा दशरथ को बहुत प्रिय हैं। यदि तुम इनके खाने-पीने का अच्छा प्रबंध कर दोगे, तो मेरी अच्छी पूजा होगी।'॥46॥
 
'These horses are very dear to my father King Dasharath. If you make good arrangements for their food and drink, I will be worshipped well.'॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)