श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 50: श्रीराम का शृङ्गवेरपुर में गङ्गा तट पर पहुँचकर रात्रि में निवास, वहाँ निषादराज गुह द्वारा उनका सत्कार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.50.3 
निवृत्तवनवासस्त्वामनृणो जगतीपते:।
पुनर्द्रक्ष्यामि मात्रा च पित्रा च सह संगत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
"वनवास की अवधि पूरी करके और राजा का ऋण चुकाकर मैं लौटकर आपसे मिलूँगा और अपने माता-पिता से भी मिलूँगा।" ॥3॥
 
"After completing the period of exile and repaying the debt of the King, I will return and see you and also meet my parents." ॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas