श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 50: श्रीराम का शृङ्गवेरपुर में गङ्गा तट पर पहुँचकर रात्रि में निवास, वहाँ निषादराज गुह द्वारा उनका सत्कार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.50.20 
क्वचित् तीररुहैर्वृक्षैर्मालाभिरिव शोभिताम्।
क्वचित् फुल्लोत्पलच्छन्नां क्वचित् पद्मवनाकुलाम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कहीं नदी के किनारे लगे वृक्ष माला बनाकर उसकी शोभा बढ़ाते हैं, कहीं उसका जल खिले हुए कमल के फूलों से ढका होता है, तो कहीं कमल के कुंजों से।
 
In some places the trees on the banks of the river form garlands and enhance its beauty. In some places its water is covered with blooming lotus flowers and in some places it is covered with lotus groves.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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