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श्लोक 2.5.23  |
तमागतमभिप्रेक्ष्य हित्वा राजासनं नृप:।
पप्रच्छ स्वमतं तस्मै कृतमित्यभिवेदयत्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| उन्हें आते देख राजा अपने सिंहासन से उठ खड़े हुए और पूछा- ‘मुनि! क्या आपने मेरा उद्देश्य पूरा कर दिया?’ वशिष्ठ ने उत्तर दिया- ‘हाँ! आपने पूरा कर दिया।’ |
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| Seeing him coming the king got up from his throne and asked- 'Muni! Did you fulfill my purpose?' Vasishtha replied- 'Yes! You did.' |
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