श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 5: वसिष्ठजी का सीता सहित श्रीराम को उपवास व्रत की दीक्षा देना,राजा दशरथ का अन्तःपुर में प्रवेश  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.5.23 
तमागतमभिप्रेक्ष्य हित्वा राजासनं नृप:।
पप्रच्छ स्वमतं तस्मै कृतमित्यभिवेदयत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उन्हें आते देख राजा अपने सिंहासन से उठ खड़े हुए और पूछा- ‘मुनि! क्या आपने मेरा उद्देश्य पूरा कर दिया?’ वशिष्ठ ने उत्तर दिया- ‘हाँ! आपने पूरा कर दिया।’
 
Seeing him coming the king got up from his throne and asked- 'Muni! Did you fulfill my purpose?' Vasishtha replied- 'Yes! You did.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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