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ramayan 2.5.22: श्वेत बादल के समान सुन्दर महल पर चढ़कर वशिष्ठ जी ने राजा दशरथ से उसी प्रकार मुलाकात की, जिस प्रकार बृहस्पति देवराज इन्द्र से मिले थे।   |   ramayan सर्ग 2.5: वसिष्ठजी का सीता सहित श्रीराम को उपवास व्रत की दीक्षा देना,राजा दशरथ का अन्तःपुर में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.5.22 
सिताभ्रशिखरप्रख्यं प्रासादमधिरुह्य च।
समीयाय नरेन्द्रेण शक्रेणेव बृहस्पति:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
श्वेत बादल के समान सुन्दर महल पर चढ़कर वशिष्ठ जी ने राजा दशरथ से उसी प्रकार मुलाकात की, जिस प्रकार बृहस्पति देवराज इन्द्र से मिले थे।
 
Climbing up to the palace which looked as beautiful as a white piece of cloud, Vasishtha met King Dasharatha in the same manner as Brihaspati was meeting Lord Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)