सिक्तसम्मृष्टरथ्या हि तथा च वनमालिनी।
आसीदयोध्या तदह: समुच्छ्रितगृहध्वजा॥ १८॥
अनुवाद
उस दिन वन और उद्यानों की पंक्तियों से सुशोभित अयोध्यापुरी में घर-घर में ऊँची-ऊँची ध्वजाएँ लहरा रही थीं; उसकी सब गलियाँ और सड़कें झाड़-बुहारकर सींची गई थीं॥ 18॥
That day, Ayodhyapuri, adorned with rows of forests and gardens, had tall flags flying in every house; all its streets and roads had been swept and sprinkled.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥