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श्लोक  2.5.14 
हृष्टनारीनरयुतं रामवेश्म तदा बभौ।
यथा मत्तद्विजगणं प्रफुल्लनलिनं सर:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय श्री राम का महल आनन्दित नर-नारियों से भरा हुआ था और मदमस्त पक्षियों के कलरव से भरे हुए कमल के तालाब के समान दिख रहा था।
 
At that time, Sri Rama's palace was filled with joyous men and women and was looking like a lotus pond filled with the chirping of intoxicated birds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)