श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 5: वसिष्ठजी का सीता सहित श्रीराम को उपवास व्रत की दीक्षा देना,राजा दशरथ का अन्तःपुर में प्रवेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.5.11 
इत्युक्त्वा स तदा राममुपवासं यतव्रत:।
मन्त्रवत् कारयामास वैदेह्या सहितं शुचि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर व्रत करने वाले मुनि ने मंत्र पढ़कर उस समय राम और सीता को व्रत की दीक्षा दी ॥11॥
 
Having said this, the holy sage who observed fasts, by reciting mantras, initiated Rama and Sita into fasting at that time. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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