vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 5: वसिष्ठजी का सीता सहित श्रीराम को उपवास व्रत की दीक्षा देना,राजा दशरथ का अन्तःपुर में प्रवेश
»
श्लोक 11
श्लोक
2.5.11
इत्युक्त्वा स तदा राममुपवासं यतव्रत:।
मन्त्रवत् कारयामास वैदेह्या सहितं शुचि:॥ ११॥
अनुवाद
ऐसा कहकर व्रत करने वाले मुनि ने मंत्र पढ़कर उस समय राम और सीता को व्रत की दीक्षा दी ॥11॥
Having said this, the holy sage who observed fasts, by reciting mantras, initiated Rama and Sita into fasting at that time. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×