प्रातस्त्वामभिषेक्ता हि यौवराज्ये नराधिप:।
पिता दशरथ: प्रीत्या ययातिं नहुषो यथा॥ १०॥
अनुवाद
'रघुनन्दन! जैसे नहुष ने ययातिक का अभिषेक किया था, उसी प्रकार कल प्रातःकाल तुम्हारे पिता महाराज दशरथ अत्यन्त प्रेमपूर्वक तुम्हारा युवराज पद पर अभिषेक करेंगे।'॥10॥
'Raghunandan! Just like Nahusha had anointed Yayatika, in the same way your father Maharaja Dasharatha will very lovingly anoint you as the crown prince tomorrow morning.'॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥