श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.49.7 
कथं नाम महाभागा सीता जनकनन्दिनी।
सदा सुखेष्वभिरता दु:खान्यनुभविष्यति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'जनकपुत्री सीता, जो सदैव भोग विलास में लीन रहती थीं, अब वनवास का दुःख कैसे सहेंगी?
 
‘How will Janaka's daughter, the great Sita, who was always immersed in pleasures, now endure the pain of exile?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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