श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.49.4 
शृण्वन् वाचो मनुष्याणां ग्रामसंवासवासिनाम्।
राजानं धिग् दशरथं कामस्य वशमास्थितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में उन्हें छोटे-बड़े गाँवों में रहने वाले लोगों के ये शब्द सुनाई दिए - 'अहा! काम के वशीभूत राजा दशरथ को धिक्कार है!॥ 4॥
 
On the way he heard the following words of the people living in the large and small villages he came across - 'Oh! Shame on King Dasharatha who has fallen under the influence of lust!॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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