श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.49.17 
राजर्षीणां हि लोकेऽस्मिन् रत्यर्थं मृगया वने।
काले कृतां तां मनुजैर्धन्विनामभिकांक्षिताम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में वन में शिकार करना राजाओं की लीला के रूप में प्रचलित था। अतः उस समय मनुपुत्रों द्वारा की गई यह लीला अन्य धनुर्धरों के लिए भी वांछनीय हो गई।॥17॥
 
‘In this world, hunting in the forest was popular as a pastime of the kings. Hence, this pastime played by the sons of Manu at that time became desirable for other archers as well.'॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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