श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.49.16 
नात्यर्थमभिकांक्षामि मृगयां सरयूवने।
रतिर्ह्येषातुला लोके राजर्षिगणसम्मता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सरयू के वनों में शिकार खेलने की मेरी अधिक इच्छा नहीं है। यह संसार में एक प्रकार का अनोखा खेल है, जो राजाओं के समुदाय को प्रिय है॥16॥
 
‘I do not have much desire to hunt in the forests of Sarayu. This is a kind of unique sport in the world, which is liked by the community of kings.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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