श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.49.14 
सूत इत्येव चाभाष्य सारथिं तमभीक्ष्णश:।
हंसमत्तस्वर: श्रीमानुवाच पुरुषोत्तम:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब परम पूज्य भगवान् श्री रामजी ने सारथि को बार-बार 'सूत!' कहकर संबोधित किया और मतवाले हंस के समान मधुर वाणी में इस प्रकार बोले-॥14॥
 
Then the most revered Personality of Godhead, Sri Rama, addressed the charioteer repeatedly, saying, 'Suta!' and in a voice as sweet as that of a drunken swan, spoke thus:॥ 14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas