श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.48.31 
नूनं पुरुषशार्दूलो मत्तमातङ्गविक्रम:।
शोभयिष्यत्यरण्यानि विचरन् स महारथ:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
"निश्चय ही उन्मत्त हाथी के समान महाबली सिंह-योद्धा श्री राम पृथ्वी पर विचरण करते हुए वनों की शोभा बढ़ाएँगे।"॥31॥
 
"Surely, like a mad elephant, the mighty lion-warrior Shri Ram will enhance the beauty of the forests while roaming on the earth." ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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