श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.48.27 
ते विषं पिबतालोडॺ क्षीणपुण्या: सुदु:खिता:।
राघवं वानुगच्छध्वमश्रुतिं वापि गच्छत॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'अतः तुम सब समझ लो कि हमारे पुण्य कर्म समाप्त हो गए हैं। यहाँ रहकर हमें बहुत दुःख भोगने पड़ेंगे। ऐसी स्थिति में या तो विष पी लो या श्री राम का अनुसरण करो या किसी ऐसे देश में चले जाओ जहाँ कैकेयी का नाम भी न सुना जाए॥ 27॥
 
‘Therefore, you all should understand that our good deeds have ended. We will have to suffer a lot by staying here. In such a situation, either drink poison or follow Shri Ram or go to some country where even the name of Kaikeyi is not heard.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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