श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.48.23 
कैकेय्या न वयं राज्ये भृतका हि वसेमहि।
जीवन्त्या जातु जीवन्त्य: पुत्रैरपि शपामहे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'हम अपने पुत्रों की शपथ खाकर कहते हैं कि जब तक कैकेयी जीवित है, हम उसके राज्य में कभी नहीं रहेंगे, चाहे हम यहीं पले-बढ़े भी हों (तब भी हम यहाँ रहना नहीं चाहेंगे)।॥ 23॥
 
'We swear by our sons that as long as Kaikeyi is alive, we will never live in her kingdom, even if we are brought up here (still we would not wish to live here).॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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