| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 2.48.22  | यया पुत्रश्च भर्ता च त्यक्तावैश्वर्यकारणात्।
कं सा परिहरेदन्यं कैकेयी कुलपांसनी॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | 'जिसने राज्य की शोभा के लिए अपने पुत्र और पति को त्याग दिया, वह कुल की कलंकिनी कैकेयी और किसका परित्याग न करेगी?॥ 22॥ | | | | 'She who abandoned her son and husband for the glory of the kingdom, whom else would that Kaikeyi, the disgrace of the family, not abandon?॥ 22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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