श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.48.20 
को न्वनेनाप्रतीतेन सोत्कण्ठितजनेन च।
सम्प्रीयेतामनोज्ञेन वासेन हृतचेतसा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यहाँ का निवास प्रेम और श्रद्धा से रहित है। यहाँ के सभी लोग श्री राम के लिए आतुर हैं। यहाँ कोई भी रहना पसंद नहीं करता और यहाँ रहने से मन अपनी सुध-बुध खो देता है। भला, ऐसे निवास से कौन प्रसन्न होगा?॥ 20॥
 
‘The residence here is devoid of love and faith. All the people here are eager for Shri Ram. No one likes to live here and the mind loses its senses by living here. Well, who will be happy with such a residence?॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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